॥ श्रीहरिः ॥
शिशुनागस्ततो भाव्यः काकवर्णस्तु तत्सुतः।
क्षेमधर्मा तस्य सुतः क्षेत्रज्ञः क्षेमधर्मजः॥ ५
śiśunāgastato bhāvyaḥ kākavarṇastu tatsutaḥ|
kṣemadharmā tasya sutaḥ kṣetrajñaḥ kṣemadharmajaḥ|| 5
अर्थ
इसके पश्चात् शिशुनाग नामका राजा होगा। शिशुनागका काकवर्ण, उसका क्षेमधर्मा और क्षेमधर्माका पुत्र होगा क्षेत्रज्ञ॥ ५॥
शिशुनागस्ततो भाव्यः काकवर्णस्तु तत्सुतः।
क्षेमधर्मा तस्य सुतः क्षेत्रज्ञः क्षेमधर्मजः॥ ५
इसके पश्चात् शिशुनाग नामका राजा होगा। शिशुनागका काकवर्ण, उसका क्षेमधर्मा और क्षेमधर्माका पुत्र होगा क्षेत्रज्ञ॥ ५॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 12.1.5 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 907) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/12/1/5/