॥ श्रीहरिः ॥
श्लोक 12.10.24
ब्राह्मणेभ्यो नमस्यामो येऽस्मद्रूपं त्रयीमयम्।
बिभ्रत्यात्मसमाधानतपःस्वाध्यायसंयमैः॥ २४
brāhmaṇebhyo namasyāmo ye'smadrūpaṃ trayīmayam|
bibhratyātmasamādhānatapaḥsvādhyāyasaṃyamaiḥ|| 24
अर्थ
हमलोग तो ब्राह्मणोंको ही नमस्कार करते हैं; क्योंकि वे चित्तकी एकाग्रता, तपस्या, स्वाध्याय, धारणा, ध्यान और समाधिके द्वारा हमारे वेदमय शरीरको धारण करते हैं॥ २४॥