श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 12.11.12

द्वादश स्कन्ध · अध्याय 11 · अथैकादशोऽध्यायः

बिभर्ति सांख्यं योगं च देवो मकरकुण्डले।

मौलिं पदं पारमेष्ठ्यं सर्वलोकाभयंकरम्॥ १२

bibharti sāṃkhyaṃ yogaṃ ca devo makarakuṇḍale|

mauliṃ padaṃ pārameṣṭhyaṃ sarvalokābhayaṃkaram|| 12

अर्थ

देवाधिदेव भगवान् सांख्य और योगरूप मकराकृत कुण्डल तथा सब लोकोंको अभय करनेवाले ब्रह्मलोकको ही मुकुटके रूपमें धारण करते हैं॥ १२॥

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