श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 12.11.21

द्वादश स्कन्ध · अध्याय 11 · अथैकादशोऽध्यायः

वासुदेवः संकर्षणः प्रद्युम्‍नः पुरुषः स्वयम्।

अनिरुद्ध इति ब्रह्मन् मूर्तिव्यूहोऽभिधीयते॥ २१

vāsudevaḥ saṃkarṣaṇaḥ pradyumnaḥ puruṣaḥ svayam|

aniruddha iti brahman mūrtivyūho'bhidhīyate|| 21

अर्थ

शौनकजी! स्वयं भगवान् ही वासुदेव, संकर्षण, प्रद्युम्‍न और अनिरुद्ध—इन चार मूर्तियोंके रूपमें अवस्थित हैं; इसलिये उन्हींको चतुर्व्यूहके रूपमें कहा जाता है॥ २१॥

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