॥ श्रीहरिः ॥
मध्वादिषु द्वादशसु भगवान् कालरूपधृक्।
लोकतन्त्राय चरति पृथग्द्वादशभिर्गणैः॥ ३२
madhvādiṣu dvādaśasu bhagavān kālarūpadhṛk|
lokatantrāya carati pṛthagdvādaśabhirgaṇaiḥ|| 32
अर्थ
कालरूपधारी भगवान् सूर्य लोगोंका व्यवहार ठीक-ठीक चलानेके लिये चैत्रादि बारह महीनोंमें अपने भिन्न-भिन्न बारह गणोंके साथ चक्कर लगाया करते हैं॥ ३२॥
मध्वादिषु द्वादशसु भगवान् कालरूपधृक्।
लोकतन्त्राय चरति पृथग्द्वादशभिर्गणैः॥ ३२
कालरूपधारी भगवान् सूर्य लोगोंका व्यवहार ठीक-ठीक चलानेके लिये चैत्रादि बारह महीनोंमें अपने भिन्न-भिन्न बारह गणोंके साथ चक्कर लगाया करते हैं॥ ३२॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 12.11.32 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 968) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/12/11/32/