श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 12.11.39

द्वादश स्कन्ध · अध्याय 11 · अथैकादशोऽध्यायः

पूषा धनंजयो वातः सुषेणः सुरुचिस्तथा।

घृताची गौतमश्‍चेति तपोमासं नयन्त्यमी॥ ३९

pūṣā dhanaṃjayo vātaḥ suṣeṇaḥ surucistathā|

ghṛtācī gautamaśceti tapomāsaṃ nayantyamī|| 39

अर्थ

शौनकजी! माघ मासमें पूषा नामके सूर्य रहते हैं। उनके साथ धनंजय नाग, वात राक्षस, सुषेण गन्धर्व, सुरुचि यक्ष, घृताची अप्सरा और गौतम ऋषि रहते हैं॥ ३९॥

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