॥ श्रीहरिः ॥
वालखिल्याः सहस्राणि षष्टिर्ब्रह्मर्षयोऽमलाः।
पुरतोऽभिमुखं यान्ति स्तुवन्ति स्तुतिभिर्विभुम्॥ ४९
vālakhilyāḥ sahasrāṇi ṣaṣṭirbrahmarṣayo'malāḥ|
purato'bhimukhaṃ yānti stuvanti stutibhirvibhum|| 49
अर्थ
इनके सिवा वालखिल्य नामके साठ हजार निर्मलस्वभाव ब्रह्मर्षि सूर्यकी ओर मुँह करके उनके आगे-आगे स्तुतिपाठ करते चलते हैं॥ ४९॥
वालखिल्याः सहस्राणि षष्टिर्ब्रह्मर्षयोऽमलाः।
पुरतोऽभिमुखं यान्ति स्तुवन्ति स्तुतिभिर्विभुम्॥ ४९
इनके सिवा वालखिल्य नामके साठ हजार निर्मलस्वभाव ब्रह्मर्षि सूर्यकी ओर मुँह करके उनके आगे-आगे स्तुतिपाठ करते चलते हैं॥ ४९॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 12.11.49 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 969) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/12/11/49/