॥ श्रीहरिः ॥
श्लोक 12.11.8
लज्जोत्तरोऽधरो लोभो दन्ता ज्योत्स्ना स्मयो भ्रमः।
रोमाणि भूरुहा भूम्नो मेघाः पुरुषमूर्धजाः॥ ८
lajjottaro'dharo lobho dantā jyotsnā smayo bhramaḥ|
romāṇi bhūruhā bhūmno meghāḥ puruṣamūrdhajāḥ|| 8
अर्थ
लज्जा ऊपरका होठ है, लोभ नीचेका होठ है, चन्द्रमाकी चाँदनी दन्तावली है, भ्रम मुसकान है, वृक्ष रोम हैं और बादल ही विराट् पुरुषके सिरपर उगे हुए बाल हैं॥ ८॥