श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 12.11.8

द्वादश स्कन्ध · अध्याय 11 · अथैकादशोऽध्यायः

लज्जोत्तरोऽधरो लोभो दन्ता ज्योत्स्ना स्मयो भ्रमः।

रोमाणि भूरुहा भूम्‍नो मेघाः पुरुषमूर्धजाः॥ ८

lajjottaro'dharo lobho dantā jyotsnā smayo bhramaḥ|

romāṇi bhūruhā bhūmno meghāḥ puruṣamūrdhajāḥ|| 8

अर्थ

लज्जा ऊपरका होठ है, लोभ नीचेका होठ है, चन्द्रमाकी चाँदनी दन्तावली है, भ्रम मुसकान है, वृक्ष रोम हैं और बादल ही विराट् पुरुषके सिरपर उगे हुए बाल हैं॥ ८॥

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