श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 12.2.11

द्वादश स्कन्ध · अध्याय 2 · अथ द्वितीयोऽध्यायः

क्षुत्तृड्भ्यां व्याधिभिश्‍चैव सन्तप्स्यन्ते च चिन्तया।

त्रिंशद्विंशतिवर्षाणि परमायुः कलौ नृणाम्॥ ११

kṣuttṛḍbhyāṃ vyādhibhiścaiva santapsyante ca cintayā|

triṃśadviṃśativarṣāṇi paramāyuḥ kalau nṛṇām|| 11

अर्थ

लोग भूख-प्यास तथा नाना प्रकारकी चिन्ताओंसे दुःखी रहेंगे। रोगोंसे तो उन्हें छुटकारा ही न मिलेगा। कलियुगमें मनुष्योंकी परमायु केवल बीस या तीस वर्षकी होगी॥ ११॥

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