श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 12.3.21

द्वादश स्कन्ध · अध्याय 3 · अथ तृतीयोऽध्यायः

तदा क्रियातपोनिष्ठा नातिहिंस्रा३ न लम्पटाः।

त्रैवर्गिकास्त्रयीवृद्धा वर्णा ब्रह्मोत्तरा नृप॥ २१

tadā kriyātaponiṣṭhā nātihiṃsrā na lampaṭāḥ|

traivargikāstrayīvṛddhā varṇā brahmottarā nṛpa|| 21

अर्थ

राजन्! उस समय वर्णोंमें ब्राह्मणोंकी प्रधानता अक्षुण्ण रहती है। लोगोंमें अत्यन्त हिंसा और लम्पटताका अभाव रहता है। सभी लोग कर्मकाण्ड और तपस्यामें निष्ठा रखते हैं और अर्थ, धर्म एवं कामरूप त्रिवर्गका सेवन करते हैं। अधिकांश लोग कर्मप्रतिपादक वेदोंके पारदर्शी विद्वान् होते हैं॥ २१॥

टिप्पणियाँ

  1. ३

    सा।

    (मुद्रित पृष्ठ 919)

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