श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 12.3.24

द्वादश स्कन्ध · अध्याय 3 · अथ तृतीयोऽध्यायः

कलौ तु धर्महेतूनां तुर्यांशोऽधर्महेतुभिः।

एधमानैः क्षीयमाणो ह्यन्ते सोऽपि विनङ्क्ष्यति॥ २४

kalau tu dharmahetūnāṃ turyāṃśo'dharmahetubhiḥ|

edhamānaiḥ kṣīyamāṇo hyante so'pi vinaṅkṣyati|| 24

अर्थ

कलियुगमें तो अधर्मके चारों चरण अत्यन्त बढ़ जाते हैं। उनके कारण धर्मके चारों चरण क्षीण होने लगते हैं और उनका चतुर्थांश ही बच रहता है। अन्तमें तो उस चतुर्थांशका भी लोप हो जाता है॥ २४॥

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