श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 12.3.39

द्वादश स्कन्ध · अध्याय 3 · अथ तृतीयोऽध्यायः

नित्यमुद्वि‌ग्‍नमनसो दुर्भिक्षकरकर्शिता।

निरन्‍ने भूतले राजन्‍ननावृष्टिभयातुराः॥ ३९

nityamudvignamanaso durbhikṣakarakarśitā|

niranne bhūtale rājannanāvṛṣṭibhayāturāḥ|| 39

अर्थ

प्रिय परीक्षित्! कलियुगकी प्रजा सूखा पड़नेके कारण अत्यन्त भयभीत और आतुर हो जाती है। एक तो दुर्भिक्ष और दूसरे शासकोंकी कर-वृद्धि! प्रजाके शरीरमें केवल अस्थिपंजर और मनमें केवल उद्वेग शेष रह जाता है। प्राण-रक्षाके लिये रोटीका टुकड़ा मिलना भी कठिन हो जाता है॥ ३९॥

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