॥ श्रीहरिः ॥
श्लोक 12.3.42
न रक्षिष्यन्ति मनुजाः स्थविरौ पितरावपि।
पुत्रान् सर्वार्थकुशलान् क्षुद्राः शिश्नोदरम्भराः॥ ४२
na rakṣiṣyanti manujāḥ sthavirau pitarāvapi|
putrān sarvārthakuśalān kṣudrāḥ śiśnodarambharāḥ|| 42
अर्थ
परीक्षित्! कलियुगके क्षुद्र प्राणी केवल कामवासनाकी पूर्ति और पेट भरनेकी धुनमें ही लगे रहते हैं। पुत्र अपने बूढ़े मा-बापकी भी रक्षा—पालन-पोषण नहीं करते, उनकी उपेक्षा कर देते हैं और पिता अपने निपुण-से-निपुण, सब कामोंमें योग्य पुत्रोंकी भी परवा नहीं करते, उन्हें अलग कर देते हैं॥ ४२॥