॥ श्रीहरिः ॥
श्लोक 12.3.50
म्रियमाणैरभिध्येयो भगवान् परमेश्वरः।
आत्मभावं नयत्यंग सर्वात्मा सर्वसंश्रयः॥ ५०
mriyamāṇairabhidhyeyo bhagavān parameśvaraḥ|
ātmabhāvaṃ nayatyaṃga sarvātmā sarvasaṃśrayaḥ|| 50
अर्थ
जो लोग मृत्युके निकट पहुँच रहे हैं, उन्हें सब प्रकारसे परम ऐश्वर्यशाली भगवान्का ही ध्यान करना चाहिये। प्यारे परीक्षित्! सबके परम आश्रय और सर्वात्मा भगवान् अपना ध्यान करनेवालेको अपने स्वरूपमें लीन कर लेते हैं, उसे अपना स्वरूप बना लेते हैं॥ ५०॥✎ 1781