श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
⌕

॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 12.6.11

द्वादश स्कन्ध · अध्याय 6 · अथ षष्ठोऽध्यायः

तक्षकः प्रहितो विप्राः क्रुद्धेन द्विजसूनुना।

हन्तुकामो नृपं गच्छन् ददर्श पथि कश्यपम्॥ ११

takṣakaḥ prahito viprāḥ kruddhena dvijasūnunā|

hantukāmo nṛpaṃ gacchan dadarśa pathi kaśyapam|| 11

अर्थ

शौनकादि ऋषियो! मुनिकुमार शृंगीने क्रोधित होकर परीक्षित‍्को शाप दे दिया था। अब उनका भेजा हुआ तक्षक सर्प राजा परीक्षित‍्को डसनेके लिये उनके पास चला। रास्तेमें उसने कश्यप नामके एक ब्राह्मणको देखा॥ ११॥✎ 1455 1456

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (2)
  • #1455 अक्षर (मुद्रित पृष्ठके पाठसे): पराक्षित‍्को → परीक्षित‍्को
  • #1456 अक्षर (मुद्रित पृष्ठके पाठसे): पराक्षित‍्को → परीक्षित‍्को

पढ़नेकी विधि

अक्षरका आकार
सामान्य
अध्यायमें क्या दिखे
रोमन लिप्यन्तरण (IAST)
पंक्तियोंके बीच
रंग
सहायता

ये विकल्प केवल इसी ब्राउज़रमें रहते हैं; कहीं भेजे नहीं जाते। कुंजियाँ: ?

↑ ↓ चुनें · Enter खोलें · Esc बन्द

कुंजियाँ

←→
पिछला या अगला पृष्ठ (श्लोक, या अध्याय)
/
खोज
CtrlK
किसी अध्याय या श्लोकपर सीधे जाएँ (Mac: ⌘ K)
AltA
पढ़नेकी विधि
?
यह सूची
Esc
खुली सूची बन्द करें