श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 12.6.29

द्वादश स्कन्ध · अध्याय 6 · अथ षष्ठोऽध्यायः

सैषा विष्णोर्महामायाबाध्ययालक्षणा यया।

मुह्यन्त्यस्यैवात्मभूता भूतेषु गुणवृत्तिभिः॥ २९

saiṣā viṣṇormahāmāyābādhyayālakṣaṇā yayā|

muhyantyasyaivātmabhūtā bhūteṣu guṇavṛttibhiḥ|| 29

अर्थ

ऋषिगण! (जिससे विद्वान् ब्राह्मणको भी क्रोध आया, राजाको शाप हुआ, मृत्यु हुई, फिर जनमेजयको क्रोध आया, सर्प मारे गये) यह वही भगवान् विष्णुकी महामाया है। यह अनिर्वचनीय है, इसीसे भगवान्‌के स्वरूपभूत जीव क्रोधादि गुण-वृत्तियोंके द्वारा शरीरोंमें मोहित हो जाते हैं, एक-दूसरेको दुःख देते और भोगते हैं और अपने प्रयत्‍नसे इसको निवृत्त नहीं कर सकते॥ २९॥

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