॥ श्रीहरिः ॥
श्लोक 12.6.53
साम्नां जैमिनये प्राह तथा छन्दोगसंहिताम्।
अथर्वांगिरसीं नाम स्वशिष्याय सुमन्तवे॥ ५३
sāmnāṃ jaiminaye prāha tathā chandogasaṃhitām|
atharvāṃgirasīṃ nāma svaśiṣyāya sumantave|| 53
अर्थ
उन्होंने ‘बह्वृच’ नामकी पहली ऋक्संहिता पैलको, ‘निगद’ नामकी दूसरी यजुःसंहिता वैशम्पायनको, सामश्रुतियोंकी ‘छन्दोग-संहिता’ जैमिनिको और अपने शिष्य सुमन्तुको ‘अथर्वांगिरससंहिता’ का अध्ययन कराया॥ ५२-५३॥