शाकल्यके एक और शिष्य थे—जातूकर्ण्यमुनि। उन्होंने अपनी संहिताके तीन विभाग करके तत्सम्बन्धी निरुक्तके साथ अपने शिष्य बलाक, पैज, वैताल और विरजको पढ़ाया॥ ५८॥
जातूकर्ण्यश्च तच्छिष्यः सनिरुक्तां स्वसंहिताम्।
बलाकपैजवैतालविरजेभ्यो ददौ मुनिः॥ ५८
शाकल्यके एक और शिष्य थे—जातूकर्ण्यमुनि। उन्होंने अपनी संहिताके तीन विभाग करके तत्सम्बन्धी निरुक्तके साथ अपने शिष्य बलाक, पैज, वैताल और विरजको पढ़ाया॥ ५८॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 12.6.58 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 940) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/12/6/58/