श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 12.6.61

द्वादश स्कन्ध · अध्याय 6 · अथ षष्ठोऽध्यायः

वैशम्पायनशिष्या वै चरकाध्वर्यवोऽभवन्।

यच्चेरुर्ब्रह्महत्यांहःक्षपणं स्वगुरोर्व्रतम्॥ ६१

vaiśampāyanaśiṣyā vai carakādhvaryavo'bhavan|

yaccerurbrahmahatyāṃhaḥkṣapaṇaṃ svagurorvratam|| 61

अर्थ

शौनकजी! वैशम्पायनके कुछ शिष्योंका नाम था चरकाध्वर्यु। इन लोगोंने अपने गुरुदेवके ब्रह्महत्या-जनित पापका प्रायश्‍चित्त करनेके लिये एक व्रतका अनुष्ठान किया। इसीलिये इनका नाम ‘चरकाध्वर्यु’ पड़ा॥ ६१॥

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