sahasrasaṃhitābhedaṃ cakre sāmnāṃ tato dvijaḥ|| 76
अर्थ
जैमिनिमुनिके एक शिष्यका नाम था सुकर्मा। वह एक महान् पुरुष था। जैसे एक वृक्षमें बहुत-सी डालियाँ होती हैं, वैसे ही सुकर्माने सामवेदकी एक हजार संहिताएँ बना दीं॥ ७६॥
सुकर्मा चापि तच्छिष्यः सामवेदतरोर्महान्।
सहस्रसंहिताभेदं चक्रे साम्नां ततो द्विजः॥ ७६
जैमिनिमुनिके एक शिष्यका नाम था सुकर्मा। वह एक महान् पुरुष था। जैसे एक वृक्षमें बहुत-सी डालियाँ होती हैं, वैसे ही सुकर्माने सामवेदकी एक हजार संहिताएँ बना दीं॥ ७६॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 12.6.76 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 942) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/12/6/76/