श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 12.7.15

द्वादश स्कन्ध · अध्याय 7 · अथ सप्तमोऽध्यायः

मन्वन्तरं मनुर्देवा मनुपुत्राः सुरेश्‍वरः।

ऋषयोंऽशावतारश्‍च हरेः षड्विधमुच्यते॥ १५

manvantaraṃ manurdevā manuputrāḥ sureśvaraḥ|

ṛṣayoṃ'śāvatāraśca hareḥ ṣaḍvidhamucyate|| 15

अर्थ

मनु, देवता, मनुपुत्र, इन्द्र, सप्तर्षि और भगवान्‌के अंशावतार—इन्हीं छः बातोंकी विशेषतासे युक्त समयको ‘मन्वन्तर’ कहते हैं॥ १५॥

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