श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 12.7.23

द्वादश स्कन्ध · अध्याय 7 · अथ सप्तमोऽध्यायः

ब्राह्मं पाद्मं वैष्णवं च शैवं लैंगं सगारुडम्।

नारदीयं भागवतमा‌ग्‍नेयं स्कान्दसंज्ञितम्॥ २३

brāhmaṃ pādmaṃ vaiṣṇavaṃ ca śaivaṃ laiṃgaṃ sagāruḍam|

nāradīyaṃ bhāgavatamāgneyaṃ skāndasaṃjñitam|| 23

अर्थ

शौनकादि ऋषियो! पुरातत्त्ववेत्ता ऐतिहासिक विद्वानोंने इन्हीं लक्षणोंके द्वारा पुराणोंकी यह पहचान बतलायी है। ऐसे लक्षणोंसे युक्त छोटे-बड़े अठारह पुराण हैं॥ २२॥ उनके नाम ये हैं —ब्रह्मपुराण, पद्मपुराण, विष्णुपुराण, शिवपुराण, लिंगपुराण, गरुडपुराण, नारदपुराण, भागवतपुराण, अग्‍निपुराण, स्कन्दपुराण, भविष्यपुराण, ब्रह्मवैवर्तपुराण, मार्कण्डेयपुराण, वामनपुराण, वराहपुराण, मत्स्यपुराण, कूर्मपुराण और ब्रह्माण्डपुराण यह अठारह हैं॥ २३-२४॥ शौनकजी! व्यासजीकी शिष्य-परम्पराने जिस प्रकार वेदसंहिता और पुराणसंहिताओंका अध्ययन-अध्यापन, विभाजन आदि किया वह मैंने तुम्हें सुना दिया। यह प्रसंग सुनने और पढ़नेवालोंके ब्रह्मतेजकी अभिवृद्धि करता है॥ २५॥

यह व्याख्या श्लोक 12.7.22 से 12.7.25 तककी एक साथ है।

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