श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 12.8.17

द्वादश स्कन्ध · अध्याय 8 · अथाष्टमोऽध्यायः

ते वै तदाश्रमं जग्मुर्हिमाद्रेः पार्श्‍व उत्तरे।

पुष्पभद्रा नदी यत्र चित्राख्या च शिला विभो॥ १७

te vai tadāśramaṃ jagmurhimādreḥ pārśva uttare|

puṣpabhadrā nadī yatra citrākhyā ca śilā vibho|| 17

अर्थ

भगवन्! वे सब उनकी आज्ञाके अनुसार उनके आश्रमपर गये। मार्कण्डेयजीका आश्रम हिमालयके उत्तरकी ओर है। वहाँ पुष्पभद्रा नामकी नदी बहती है और उसके पास ही चित्रा नामकी एक शिला है॥ १७॥

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