श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 12.8.6

द्वादश स्कन्ध · अध्याय 8 · अथाष्टमोऽध्यायः

सूत उवाच

प्रश्‍नस्त्वया महर्षेऽयं कृतो लोकभ्रमापहः।

नारायणकथा यत्र गीता कलिमलापहा॥ ६

praśnastvayā maharṣe'yaṃ kṛto lokabhramāpahaḥ|

nārāyaṇakathā yatra gītā kalimalāpahā|| 6

अर्थ

सूतजीने कहा—शौनकजी! आपने बड़ा सुन्दर प्रश्‍न किया। इससे लोगोंका भ्रम मिट जायगा और सबसे बड़ी बात तो यह है कि इस कथामें भगवान् नारायणकी महिमा है। जो इसका गान करता है, उसके सारे कलिमल नष्ट हो जाते हैं॥ ६॥

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