श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 12.9.6

द्वादश स्कन्ध · अध्याय 9 · अथ नवमोऽध्यायः

अथाप्यम्बुजपत्राक्ष पुण्यश्‍लोकशिखामणे।

द्रक्ष्ये मायां यया लोकः सपालो वेद सद्भिदाम्॥ ६

athāpyambujapatrākṣa puṇyaślokaśikhāmaṇe|

drakṣye māyāṃ yayā lokaḥ sapālo veda sadbhidām|| 6

अर्थ

पवित्रकीर्ति महानुभावोंके शिरोमणि कमलनयन! फिर भी आपकी आज्ञाके अनुसार मैं आपसे वर माँगता हूँ। मैं आपकी वह माया देखना चाहता हूँ, जिससे मोहित होकर सभी लोक और लोकपाल अद्वितीय वस्तु ब्रह्ममें अनेकों प्रकारके भेद-विभेद देखने लगते हैं॥ ६॥✎ 1784

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
  • #1784 पंक्तिके अन्तका योजक-चिह्न: शरणागत-भयहारी → शरणागतभयहारी

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