परीक्षित्! अभी तो तुम्हारे जीवनकी अवधि सात दिनकी है। इस बीचमें ही तुम अपने परम कल्याणके लिये जो कुछ करना चाहिये, सब कर लो॥ १४॥
तवाप्येतर्हि कौरव्य सप्ताहं जीवितावधिः।
उपकल्पय तत्सर्वं तावद्यत्साम्परायिकम्॥ १४
परीक्षित्! अभी तो तुम्हारे जीवनकी अवधि सात दिनकी है। इस बीचमें ही तुम अपने परम कल्याणके लिये जो कुछ करना चाहिये, सब कर लो॥ १४॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 2.1.14 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 182) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/2/1/14/