विराट् पुरुषरूप ‘नर’ से उत्पन्न होनेके कारण ही जलका नाम ‘नार’ पड़ा और उस अपने उत्पन्न किये हुए ‘नार’ में वह पुरुष एक हजार वर्षोंतक रहा, इसीसे उसका नाम ‘नारायण’ हुआ॥ ११॥✎ 180
तास्ववात्सीत् स्वसृष्टासु सहस्रपरिवत्सरान्।
तेन नारायणो नाम यदापः पुरुषोद्भवाः॥ ११
विराट् पुरुषरूप ‘नर’ से उत्पन्न होनेके कारण ही जलका नाम ‘नार’ पड़ा और उस अपने उत्पन्न किये हुए ‘नार’ में वह पुरुष एक हजार वर्षोंतक रहा, इसीसे उसका नाम ‘नारायण’ हुआ॥ ११॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 2.10.11 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 229) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/2/10/11/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
#180 शब्दोंके बीचका स्थान: नारायणभगवान् की → नारायणभगवान्की