॥ श्रीहरिः ॥
श्लोक 2.10.12
द्रव्यं कर्म च कालश्च स्वभावो जीव एव च।
यदनुग्रहतः सन्ति न सन्ति यदुपेक्षया॥ १२
dravyaṃ karma ca kālaśca svabhāvo jīva eva ca|
yadanugrahataḥ santi na santi yadupekṣayā|| 12
अर्थ
उन नारायणभगवान्की कृपासे ही द्रव्य, कर्म, काल, स्वभाव और जीव आदिकी सत्ता है। उनके उपेक्षा कर देनेपर और किसीका अस्तित्व नहीं रहता॥ १२॥✎ 180