श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 2.10.19

द्वितीय स्कन्ध · अध्याय 10 · अथ दशमोऽध्यायः

विवक्षोर्मुखतो भूम्नो वह्निर्वाग् व्याहृतं तयोः।

जले वै तस्य२ सुचिरं निरोधः समजायत॥ १९

vivakṣormukhato bhūmno vahnirvāg vyāhṛtaṃ tayoḥ|

jale vai tasya suciraṃ nirodhaḥ samajāyata|| 19

अर्थ

जब उनकी इच्छा बोलनेकी हुई तब वाक्-इन्द्रिय, उसके अधिष्ठातृदेवता अग्‍नि और उनका विषय बोलना—ये तीनों प्रकट हुए। इसके बाद बहुत दिनोंतक उस जलमें ही वे रुके रहे॥ १९॥

टिप्पणियाँ

  1. २

    प्रा० पा०—सुचिरं तस्य।

    (मुद्रित पृष्ठ 230)

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