सूतजी! आपका स्वभाव बड़ा सौम्य है। आप विदुरजीका वह चरित्र हमें सुनाइये। उन्होंने अपने भाई-बन्धुओंको क्यों छोड़ा और फिर उनके पास क्यों लौट आये?॥ ५०॥
ब्रूहि नस्तदिदं सौम्य विदुरस्य विचेष्टितम्।
बन्धुत्यागनिमित्तं च तथैवागतवान् पुनः॥ ५०
सूतजी! आपका स्वभाव बड़ा सौम्य है। आप विदुरजीका वह चरित्र हमें सुनाइये। उन्होंने अपने भाई-बन्धुओंको क्यों छोड़ा और फिर उनके पास क्यों लौट आये?॥ ५०॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 2.10.50 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 234) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/2/10/50/