सूतजीने कहा—शौनकादि ऋषियो! राजा परीक्षित्ने भी यही बात पूछी थी। उनके प्रश्नोंके उत्तरमें श्रीशुकदेवजी महाराजने जो कुछ कहा था, वही मैं आपलोगोंसे कहता हूँ। सावधान होकर सुनिये॥ ५१॥
राज्ञा परीक्षिता पृष्टो यदवोचन्महामुनिः।
तद्वोऽभिधास्ये शृणुत राज्ञः प्रश्नानुसारतः॥ ५१
सूतजीने कहा—शौनकादि ऋषियो! राजा परीक्षित्ने भी यही बात पूछी थी। उनके प्रश्नोंके उत्तरमें श्रीशुकदेवजी महाराजने जो कुछ कहा था, वही मैं आपलोगोंसे कहता हूँ। सावधान होकर सुनिये॥ ५१॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 2.10.51 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 234) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/2/10/51/