svalakṣitagatirbrahman sarveṣāṃ mama ceśvaraḥ|| 20
अर्थ
नारद! इन्द्रियातीत भगवान् गुणोंके इन तीन आवरणोंसे अपने स्वरूपको भलीभाँति ढक लेते हैं, इसलिये लोग उनको नहीं जान पाते। सारे संसारके और मेरे भी एकमात्र स्वामी वे ही हैं॥ २०॥✎ 1361581
स एष भगवाँल्लिङ्गैस्त्रिभिरेभिरधोक्षजः।
स्वलक्षितगतिर्ब्रह्मन् सर्वेषां मम चेश्वरः॥ २०
नारद! इन्द्रियातीत भगवान् गुणोंके इन तीन आवरणोंसे अपने स्वरूपको भलीभाँति ढक लेते हैं, इसलिये लोग उनको नहीं जान पाते। सारे संसारके और मेरे भी एकमात्र स्वामी वे ही हैं॥ २०॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 2.5.20 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 201) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/2/5/20/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (2)