ये ही तीनों गुण द्रव्य, ज्ञान और क्रियाका आश्रय लेकर मायातीत नित्यमुक्त पुरुषको ही मायामें स्थित होनेपर कार्य, कारण और कर्तापनके अभिमानसे बाँध लेते हैं॥ १९॥✎ 1361581
कार्यकारणकर्तृत्वे द्रव्यज्ञानक्रियाश्रयाः।
बध्नन्ति नित्यदा मुक्तं मायिनं पुरुषं गुणाः॥ १९
ये ही तीनों गुण द्रव्य, ज्ञान और क्रियाका आश्रय लेकर मायातीत नित्यमुक्त पुरुषको ही मायामें स्थित होनेपर कार्य, कारण और कर्तापनके अभिमानसे बाँध लेते हैं॥ १९॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 2.5.19 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 201) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/2/5/19/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (2)