भगवान् मायाके गुणोंसे रहित एवं अनन्त हैं। सृष्टि, स्थिति और प्रलयके लिये रजोगुण, सत्त्वगुण और तमोगुण—ये तीन गुण मायाके द्वारा उनमें स्वीकार किये गये हैं॥ १८॥✎ 1361581
सत्त्वं रजस्तम इति निर्गुणस्य गुणास्त्रयः।
स्थितिसर्गनिरोधेषु गृहीता मायया विभोः॥ १८
भगवान् मायाके गुणोंसे रहित एवं अनन्त हैं। सृष्टि, स्थिति और प्रलयके लिये रजोगुण, सत्त्वगुण और तमोगुण—ये तीन गुण मायाके द्वारा उनमें स्वीकार किये गये हैं॥ १८॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 2.5.18 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 200) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/2/5/18/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (2)