जलके विकारसे पृथ्वीकी उत्पत्ति हुई, इसका गुण है गन्ध। कारणके गुण कार्यमें आते हैं—इस न्यायसे शब्द, स्पर्श, रूप और रस—ये चारों गुण भी इसमें विद्यमान हैं॥ २९॥✎ 137138
विशेषस्तु विकुर्वाणादम्भसो गन्धवानभूत्।
परान्वयाद् रसस्पर्शशब्दरूपगुणान्वितः॥ २९
जलके विकारसे पृथ्वीकी उत्पत्ति हुई, इसका गुण है गन्ध। कारणके गुण कार्यमें आते हैं—इस न्यायसे शब्द, स्पर्श, रूप और रस—ये चारों गुण भी इसमें विद्यमान हैं॥ २९॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 2.5.29 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 201) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/2/5/29/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (2)