श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 2.5.29

द्वितीय स्कन्ध · अध्याय 5 · अथ पञ्चमोऽध्यायः

विशेषस्तु विकुर्वाणादम्भसो गन्धवानभूत्।

परान्वयाद् रसस्पर्शशब्दरूपगुणान्वितः॥ २९

viśeṣastu vikurvāṇādambhaso gandhavānabhūt|

parānvayād rasasparśaśabdarūpaguṇānvitaḥ|| 29

अर्थ

जलके विकारसे पृथ्वीकी उत्पत्ति हुई, इसका गुण है गन्ध। कारणके गुण कार्यमें आते हैं—इस न्यायसे शब्द, स्पर्श, रूप और रस—ये चारों गुण भी इसमें विद्यमान हैं॥ २९॥✎ 137 138

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (2)
  • #137 शब्दोंके बीचका स्थान: भगवान् की → भगवान्‌की
  • #138 शब्दोंके बीचका स्थान: भगवान् ने → भगवान्‌ने

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