श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 2.5.3

द्वितीय स्कन्ध · अध्याय 5 · अथ पञ्चमोऽध्यायः

सर्वं ह्येतद् भवान् वेद भूतभव्यभवत्प्रभुः।

करामलकवद् विश्‍वं विज्ञानावसितं तव॥ ३

sarvaṃ hyetad bhavān veda bhūtabhavyabhavatprabhuḥ|

karāmalakavad viśvaṃ vijñānāvasitaṃ tava|| 3

अर्थ

आप तो यह सब कुछ जानते हैं; क्योंकि जो कुछ हुआ है, हो रहा है या होगा, उसके स्वामी आप ही हैं। यह सारा संसार हथेलीपर रखे हुए आँवलेके समान आपकी ज्ञान-दृष्टिके अन्तर्गत ही है॥ ३॥

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