ब्राह्मण इस विराट् पुरुषका मुख है, भुजाएँ क्षत्रिय हैं, जाँघोंसे वैश्य और पैरोंसे शूद्र उत्पन्न हुए हैं॥ ३७॥✎ 139140
पुरुषस्य मुखं ब्रह्म क्षत्रमेतस्य बाहवः।
ऊर्वोर्वैश्यो भगवतः पद्भ्यां शूद्रोऽभ्यजायत॥ ३७
ब्राह्मण इस विराट् पुरुषका मुख है, भुजाएँ क्षत्रिय हैं, जाँघोंसे वैश्य और पैरोंसे शूद्र उत्पन्न हुए हैं॥ ३७॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 2.5.37 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 202) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/2/5/37/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (2)