श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 2.5.8

द्वितीय स्कन्ध · अध्याय 5 · अथ पञ्चमोऽध्यायः

एतन्मे पृच्छतः सर्वं सर्वज्ञ सकलेश्‍वर।

विजानीहि यथैवेदमहं बुद्ध्येऽनुशासितः॥ ८

etanme pṛcchataḥ sarvaṃ sarvajña sakaleśvara|

vijānīhi yathaivedamahaṃ buddhye'nuśāsitaḥ|| 8

अर्थ

पिताजी! आप सर्वज्ञ और सर्वेश्‍वर हैं। जो कुछ मैं पूछ रहा हूँ, वह सब आप कृपा करके मुझे इस प्रकार समझाइये कि जिससे मैं आपके उपदेशको ठीक-ठीक समझ सकूँ॥ ८॥

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