पिताजी! आप सर्वज्ञ और सर्वेश्वर हैं। जो कुछ मैं पूछ रहा हूँ, वह सब आप कृपा करके मुझे इस प्रकार समझाइये कि जिससे मैं आपके उपदेशको ठीक-ठीक समझ सकूँ॥ ८॥
एतन्मे पृच्छतः सर्वं सर्वज्ञ सकलेश्वर।
विजानीहि यथैवेदमहं बुद्ध्येऽनुशासितः॥ ८
पिताजी! आप सर्वज्ञ और सर्वेश्वर हैं। जो कुछ मैं पूछ रहा हूँ, वह सब आप कृपा करके मुझे इस प्रकार समझाइये कि जिससे मैं आपके उपदेशको ठीक-ठीक समझ सकूँ॥ ८॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 2.5.8 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 199) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/2/5/8/