श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 2.5.9

द्वितीय स्कन्ध · अध्याय 5 · अथ पञ्चमोऽध्यायः

ब्रह्मोवाच

सम्यक् कारुणिकस्येदं वत्स ते विचिकित्सितम्।

यदहं चोदितः सौम्य भगवद्वीर्यदर्शने॥ ९

samyak kāruṇikasyedaṃ vatsa te vicikitsitam|

yadahaṃ coditaḥ saumya bhagavadvīryadarśane|| 9

अर्थ

ब्रह्माजीने कहा—बेटा नारद! तुमने जीवोंके प्रति करुणाके भावसे भरकर यह बहुत ही सुन्दर प्रश्न किया है; क्योंकि इससे भगवान्‌के गुणोंका वर्णन करनेकी प्रेरणा मुझे प्राप्त हुई है॥ ९॥✎ 136 1581

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (2)
  • #136 शब्दोंके बीचका स्थान: भगवान् से → भगवान्‌से
  • #1581 पंक्तिके अन्तका योजक-चिह्न: इच्छा-नुसार → इच्छानुसार

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