नारद! इनके सिवा परम पुरुष परमात्माके परम पवित्र एवं प्रधान-प्रधान लीलावतार भी शास्त्रोंमें वर्णित हैं। उनका मैं क्रमशः वर्णन करता हूँ। उनके चरित्र सुननेमें बड़े मधुर एवं श्रवणेन्द्रियके दोषोंको दूर करनेवाले हैं। तुम सावधान होकर उनका रस लो॥ ४५॥✎ 12921952
प्राधान्यतो यानृष आमनन्ति
लीलावतारान् पुरुषस्य भूम्नः।
आपीयतां कर्णकषायशोषा-
ननुक्रमिष्ये त इमान् सुपेशान्॥ ४५
नारद! इनके सिवा परम पुरुष परमात्माके परम पवित्र एवं प्रधान-प्रधान लीलावतार भी शास्त्रोंमें वर्णित हैं। उनका मैं क्रमशः वर्णन करता हूँ। उनके चरित्र सुननेमें बड़े मधुर एवं श्रवणेन्द्रियके दोषोंको दूर करनेवाले हैं। तुम सावधान होकर उनका रस लो॥ ४५॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 2.6.45 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 208) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/2/6/45/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (2)
#1292 अक्षर (मुद्रित पृष्ठके पाठसे): अनन्त-भगवान्के → अनन्तभगवान्के
#1952 मुद्रणकी अपनी भूल (गीताप्रेसके पुराने संस्करणों और ग्रन्थकी अपनी गणनासे): भगवत्त्वरूप → भगवत्स्वरूप