हिंसाया निर्ऋतेर्मृत्योर्निरयस्य गुदः स्मृतः॥ ८ ✎ 996997
pāyuryamasya mitrasya parimokṣasya nārada|
hiṃsāyā nir:ṛtermṛtyornirayasya gudaḥ smṛtaḥ|| 8
अर्थ
नारदजी! विराट् पुरुषकी पायु-इन्द्रिय यम, मित्र और मलत्यागका तथा गुदाद्वार हिंसा, निर्ऋति, मृत्यु और नरकका उत्पत्तिस्थान है॥ ८॥✎ 12901291
पायुर्यमस्य मित्रस्य परिमोक्षस्य नारद।
हिंसाया निर्ऋतेर्मृत्योर्निरयस्य गुदः स्मृतः॥ ८
नारदजी! विराट् पुरुषकी पायु-इन्द्रिय यम, मित्र और मलत्यागका तथा गुदाद्वार हिंसा, निर्ऋति, मृत्यु और नरकका उत्पत्तिस्थान है॥ ८॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 2.6.8 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 204) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/2/6/8/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (4)
#996 अक्षर (मुद्रित पृष्ठके पाठसे): निऋर्तेर्मृत्योर्निरयस्य → निऋर्ऋतेर्मृत्योर्निरयस्य
#997 अक्षर (मुद्रित पृष्ठके पाठसे): निऋर्ऋतेर्मृत्योर्निरयस्य → निर्ऋतेर्मृत्योर्निरयस्य
#1290 अक्षर (मुद्रित पृष्ठके पाठसे): निऋर्ति, → निऋर्ऋति,
#1291 अक्षर (मुद्रित पृष्ठके पाठसे): निऋर्ऋति, → निर्ऋति,