श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 2.6.9

द्वितीय स्कन्ध · अध्याय 6 · अथ षष्ठोऽध्यायः

पराभूतेरधर्मस्य तमसश्चापि पश्चिमः।

नाड्यो नदनदीनां तु गोत्राणामस्थिसंहतिः॥ ९

parābhūteradharmasya tamasaścāpi paścimaḥ|

nāḍyo nadanadīnāṃ tu gotrāṇāmasthisaṃhatiḥ|| 9

अर्थ

उनकी पीठसे पराजय, अधर्म और अज्ञान, नाड़ियोंसे नद-नदी और हड्डियोंसे पर्वतोंका निर्माण हुआ है॥ ९॥✎ 1290 1291

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (2)
  • #1290 अक्षर (मुद्रित पृष्ठके पाठसे): निऋर्ति, → निऋर्ऋति,
  • #1291 अक्षर (मुद्रित पृष्ठके पाठसे): निऋर्ऋति, → निर्ऋति,

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