श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 2.8.15

द्वितीय स्कन्ध · अध्याय 8 · अथाष्टमोऽध्यायः

भूपातालककुब्व्योमग्रहनक्षत्रभूभृताम् ।

सरित्समुद्रद्वीपानां सम्भवश्चैतदोकसाम्॥ १५

bhūpātālakakubvyomagrahanakṣatrabhūbhṛtām |

saritsamudradvīpānāṃ sambhavaścaitadokasām|| 15

अर्थ

पृथ्वी, पाताल, दिशा, आकाश, ग्रह, नक्षत्र, पर्वत, नदी, समुद्र, द्वीप और उनमें रहनेवाले जीवोंकी उत्पत्ति कैसे होती है?॥ १५॥✎ 167 168

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (2)
  • #167 शब्दोंके बीचका स्थान: भगवान् की → भगवान्‌की
  • #168 शब्दोंके बीचका स्थान: भगवान् की → भगवान्‌की

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