भगवन्! मैं यह सब आपसे पूछ रहा हूँ। मैं आपकी शरणमें हूँ। महामुने! आप कृपा करके क्रमशः इनका तात्त्विक निरूपण कीजिये॥ २४॥✎ 167168
सर्वमेतच्च भगवन् पृच्छते मेऽनुपूर्वशः।
तत्त्वतोऽर्हस्युदाहर्तुं प्रपन्नाय महामुने॥ २४
भगवन्! मैं यह सब आपसे पूछ रहा हूँ। मैं आपकी शरणमें हूँ। महामुने! आप कृपा करके क्रमशः इनका तात्त्विक निरूपण कीजिये॥ २४॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 2.8.24 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 221) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/2/8/24/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (2)