श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 3.1.2

तृतीय स्कन्ध · अध्याय 1 · अथ प्रथमोऽध्यायः

यद्वा अयं मन्त्रकृद्वो भगवानखिलेश्‍वरः।

पौरवेन्द्रगृहं हित्वा प्रविवेशात्मसात्कृतम्॥ २

yadvā ayaṃ mantrakṛdvo bhagavānakhileśvaraḥ|

pauravendragṛhaṃ hitvā praviveśātmasātkṛtam|| 2

अर्थ

जब सर्वेश्‍वर भगवान् श्रीकृष्ण पाण्डवोंके दूत बनकर गये थे, तब वे दुर्योधनके महलोंको छोड़कर, उसी विदुरजीके घरमें उसे अपना ही समझकर बिना बुलाये चले गये थे॥ २॥

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