पवित्रात्मा विदुरने महात्मा मैत्रेयजीसे कोई साधारण प्रश्न नहीं किया होगा; क्योंकि उसे तो मैत्रेयजी-जैसे साधुशिरोमणिने अभिनन्दनपूर्वक उत्तर देकर महिमान्वित किया था॥ ४॥
न ह्यल्पार्थोदयस्तस्य विदुरस्यामलात्मनः।
तस्मिन् वरीयसि प्रश्नः साधुवादोपबृंहितः॥ ४
पवित्रात्मा विदुरने महात्मा मैत्रेयजीसे कोई साधारण प्रश्न नहीं किया होगा; क्योंकि उसे तो मैत्रेयजी-जैसे साधुशिरोमणिने अभिनन्दनपूर्वक उत्तर देकर महिमान्वित किया था॥ ४॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 3.1.4 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 235) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/3/1/4/