श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 3.10.22

तृतीय स्कन्ध · अध्याय 10 · अथ दशमोऽध्यायः

खरोऽश्वोऽश्‍वतरो गौरः शरभश्‍चमरी तथा।

एते चैकशफाः क्षत्तः शृणु पञ्चनखान् पशून्॥ २२

kharo'śvo'śvataro gauraḥ śarabhaścamarī tathā|

ete caikaśaphāḥ kṣattaḥ śṛṇu pañcanakhān paśūn|| 22

अर्थ

गधा, घोड़ा, खच्चर, गौरमृग, शरफ और चमरी—ये एकशफ (एक खुरवाले) हैं। अब पाँच नखवाले पशु-पक्षियोंके नाम सुनो॥ २२॥✎ 1589

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
  • #1589 पंक्तिके अन्तका योजक-चिह्न: (मुँह)-से → (मुँह)से

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