श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 3.10.5

तृतीय स्कन्ध · अध्याय 10 · अथ दशमोऽध्यायः

तद्विलोक्याब्जसम्भूतो वायुना यदधिष्ठितः।

पद्ममम्भश्‍च तत्कालकृतवीर्येण कम्पितम्॥ ५

tadvilokyābjasambhūto vāyunā yadadhiṣṭhitaḥ|

padmamambhaśca tatkālakṛtavīryeṇa kampitam|| 5

अर्थ

ब्रह्माजीने देखा कि प्रलयकालीन प्रबल वायुके झकोरोंसे, जिससे वे उत्पन्‍न हुए हैं तथा जिसपर वे बैठे हुए हैं वह कमल तथा जल काँप रहे हैं॥ ५॥

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