श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 3.11.13

तृतीय स्कन्ध · अध्याय 11 · अथैकादशोऽध्यायः

ग्रहर्क्षताराचक्रस्थः परमाण्वादिना जगत्।

संवत्सरावसानेन पर्येत्यनिमिषो विभुः॥ १३

graharkṣatārācakrasthaḥ paramāṇvādinā jagat|

saṃvatsarāvasānena paryetyanimiṣo vibhuḥ|| 13

अर्थ

चन्द्रमा आदि ग्रह, अश्विनी आदि नक्षत्र और समस्त तारा-मण्डलके अधिष्ठाता कालस्वरूप भगवान् सूर्य परमाणुसे लेकर संवत्सरपर्यन्त कालमें द्वादश राशिरूप सम्पूर्ण भुवनकोशकी निरन्तर परिक्रमा किया करते हैं॥ १३॥

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