kṣaṇān pañca viduḥ kāṣṭhāṃ laghu tā daśa pañca ca|| 7
अर्थ
तीन लवको एक ‘निमेष’ और तीन निमेषको एक ‘क्षण’ कहते हैं। पाँच क्षणकी एक ‘काष्ठा’ होती है और पन्द्रह काष्ठाका एक ‘लघु’॥ ७॥
निमेषस्त्रिलवो ज्ञेय आम्नातस्ते त्रयः क्षणः।
क्षणान् पञ्च विदुः काष्ठां लघु ता दश पञ्च च॥ ७
तीन लवको एक ‘निमेष’ और तीन निमेषको एक ‘क्षण’ कहते हैं। पाँच क्षणकी एक ‘काष्ठा’ होती है और पन्द्रह काष्ठाका एक ‘लघु’॥ ७॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 3.11.7 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 282) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/3/11/7/